2006 से पूर्व तक प्लूटो एक ग्रह के रूप में वर्गीकृत था। अरसे तक यह मंगल व बुध जितना बड़ा ग्रह माना गया। पर 1970 में प्लूटो के सबसे बड़े चन्द्रमा शैरन की खोज ने इस धारणा को बदल दिया। खगोलविदों ने शैरन की परिक्रमा अवधि व प्लूटो से उसकी दूरी की गणना की। इस आधार पर प्लूटो व शैरन के संयुक्त द्रव्यमान का आकलन किया। उन्होंने पाया कि दोनों का साझा द्रव्यमान हमारे चन्द्रमा से भी कम है। प्लूटो का आकार समकालीन खोजे गए सौरमंडल के अन्य खगोलीय पिंडों के समकक्ष पाया गया। इस बात ने खगोलविदों को यह सोचने के लिए मजबूर कर दिया कि आखिर प्लूटो है क्या ? कम से कम यह ग्रह तो नहीं है।
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| 2006 में प्लूटो को ग्रहों की बिरादरी से निकल दिया गया। |
आख़िरकार प्लूटो से ग्रह का दर्जा क्यों छीन लिया गया ? यह कहानी भी बड़ी रोचक है। सन 2006 में सैंकड़ों खगोलविद प्लूटो पर चर्चा के लिए पैरुग्वे में जुटे। लम्बी जद्दोजहद के बाद ग्रहों को सिरे से परिभाषित किया गया। साथ ही साथ 'वामन ग्रह' के रूप में एक अतिरिक्त नए वर्ग को भी जोड़ा गया। ग्रहों और वामन ग्रहों के लिए कुछ विशेष नियम बनाए गए। प्लूटो ने ग्रह होने की आवश्यक दो शर्तों को तो पूरा किया पर अंतिम शर्त पर वह खरा नहीं उतर सका। अंतिम नियम के अनुसार ग्रह की कक्षा से लगा क्षेत्र साफ़ सुथरा होना चाहिए अर्थात् कक्षा के आसपास अन्य कोई भी खगोलीय पिंड मौजूद नहीं होना चाहिए। प्लूटो कुइपर बेल्ट का सदस्य है जिसके आसपास बर्फीले खण्डों की भरमार है। नई परिभाषा के अनुसार प्लूटो ग्रह होने की पात्रता नहीं रखता था। आखिरकार प्लूटो को वामन ग्रह की श्रेणी में डाल दिया गया।
